उत्तराखंड के चमोली में भूकंप, दिल्ली-एनसीआर तक कांपी धरती
उत्तराखंड के चमोली में मंगलवार रात 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ जिसके झटके दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किए गए।
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मंगलवार रात करीब 10:22 बजे दिल्ली-एनसीआर में खिड़कियां और पंखे हिलने लगे। यह झटका उत्तराखंड के चमोली में आए भूकंप का था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने इसकी तीव्रता 4.9 और यूरोपीय एजेंसी EMSC ने 5.1 मापी। चमोली जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन टीमों के अनुसार किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
6 अक्टूबर 2026 की इस रात जमीन के भीतर हुई हलचल ने उत्तरी भारत के बड़े हिस्से को हिला दिया। चमोली से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में लोग दहशत में आ गए। जमीन का यह कंपन रात के सन्नाटे में अचानक दर्ज हुआ, जिसके तुरंत बाद मोबाइल स्क्रीनों पर संदेशों की बाढ़ आ गई।
चमोली में रात का कंपन
घड़ी में रात के 10:20 से 10:23 बजे के बीच चमोली की जमीन में कंपन हुआ। पहाड़ी घाटियों से निकली यह कंपन तरंग सैकड़ों किलोमीटर दूर तक फैली। नोएडा, गुरुग्राम और दिल्ली की कई सोसायटियों में लोग फ्लैटों से नीचे उतर आए। चमोली के स्थानीय निवासियों ने बताया कि कुछ सेकेंड तक जमीन में थरथराहट बनी रही।
उत्तराखंड के पहाड़ी भूभाग में यह हलचल सतह के नीचे सीमित दायरे से शुरू होकर मैदानों की तरफ बढ़ी। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक यह झटका उत्तर-पश्चिम में हिमाचल प्रदेश तक महसूस किया गया। पहाड़ी ढलानों पर बसे गांवों से लेकर नदी घाटियों तक पत्थरों और मकानों में कंपन की सरसराहट सुनी गई। अचानक आए इस झटके से लोग घरों के दरवाजे खोलकर बाहर निकल आए।
दिनभर की सामान्य गतिविधियों के बाद लोग सोने की तैयारी में थे। ठीक उसी समय फर्श हिलने और दरवाजों की चूलें खड़कने की आवाज आई। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड होने के बावजूद लोग कुछ देर खुले में खड़े रहे। रात के वक्त झटके आने पर अक्सर यह तय करना कठिन होता है कि झटका खत्म हो चुका है या दोबारा आ सकता है।
हिमालयी प्लेटों का दबाव
भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट की तरफ लगातार खिसक रही है। इस दबाव से हिमालय की फॉल्ट लाइनों पर तनाव जमा होता है। जब चट्टानें इस खिंचाव को रोक नहीं पातीं, तो ऊर्जा सिस्मिक तरंगों के रूप में बाहर निकलती है।
टेक्टोनिक प्लेटों के किनारे आपस में रगड़ खाते हैं। इस घर्षण के कारण चट्टानी परतों के बीच खिंचाव लगातार बढ़ता रहता है। जब यह अवरोध टूटता है, तो प्लेटें अपनी जगह से फिसलती हैं या टकराती हैं। इसी टकराव से भारी मात्रा में सिस्मिक ऊर्जा तरंगों के रूप में चारों दिशाओं में फैलती है। चमोली का यह क्षेत्र इसी तरह की सक्रिय टेक्टोनिक संरचना के बीच स्थित है, जहां भूगर्भीय दबाव का बनना और निकलना नियमित प्रक्रिया है।
तीव्रता और गहराई के आंकड़े
सीस्मोलॉजिकल एजेंसियों के डेटा में मामूली भिन्नता दर्ज हुई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इसका केंद्र चमोली में जमीन से 13 किलोमीटर नीचे दर्ज किया। यूरोपीय-भूमध्यसागरीय सीस्मोलॉजिकल केंद्र (EMSC) ने केंद्र की गहराई 10 किलोमीटर आंकी, जो करीब 6.21 मील बनती है।
| निगरानी एजेंसी | दर्ज तीव्रता | केंद्र की गहराई | दर्ज समय | चिह्नित केंद्र क्षेत्र |
|---|---|---|---|---|
| NCS (भारत) | 4.9 | 13 किमी | 10:22 PM | चमोली, उत्तराखंड |
| EMSC (यूरोप) | 5.1 | 10 किमी | 10:20 - 10:23 PM | पश्चिमी शिज़ांग-भारत सीमा |
| NDTV रिपोर्ट | 4.9 | 13 किमी | 10:20 PM | चमोली जिला |
| Ground News ट्रैकर | 4.9 - 5.1 | 10 - 13 किमी | 10:23 PM | चमोली / सीमावर्ती क्षेत्र |
| रॉयटर्स और एएनआई (खलीज टाइम्स) | 4.9 - 5.1 | 10 - 13 किमी | 10:22 PM | पश्चिमी शिज़ांग-भारत सीमा |
| सीडरन्यूज रिपोर्ट | 4.9 | 13 किमी | 10:22 PM | बागेश्वर के समीप |
पहाड़ी इलाकों में 10 से 13 किलोमीटर का फोकस अपेक्षाकृत उथला होता है। केंद्र सतह के जितना नजदीक होगा, झटके का दायरा उतना ज्यादा महसूस होता है।
सीस्मोलॉजिकल नेटवर्क के सेंसर जब सिस्मिक तरंगों को पकड़ते हैं, तो उनकी गति और समय के आधार पर भूकंप का सटीक केंद्र निकाला जाता है। प्राइमरी और सेकेंडरी तरंगों के पहुंचने के समय का अंतर ही गहराई और दूरी तय करता है। चूंकि अलग-अलग एजेंसियों के सेंसर स्टेशन अलग स्थानों पर हैं, इसलिए उनके गणना मॉडल में 2 से 3 किलोमीटर की गहराई और तीव्रता में 0.2 अंकों का अंतर आना सामान्य माना जाता है।
भौगोलिक स्थिति के निर्धारण में भी थोड़ा अंतर देखा गया। भारतीय एजेंसियों ने इसका केंद्र चमोली जिले के निर्देशांक अक्षांश 30.103 उत्तर और देशांतर 79.561 पूर्व पर बताया। यूरोपीय एजेंसी EMSC ने इसे पश्चिमी शिज़ांग-भारत सीमावर्ती क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया। वहीं कुछ क्षेत्रीय मीडिया मंचों जैसे सीडरन्यूज ने इसे बागेश्वर के निकटवर्ती इलाके से जोड़कर देखा।
एजेंसी डेटा और समय का अंतर
भूकंपीय घटनाओं के समय की रिकॉर्डिंग अलग-अलग रिपोर्टों में थोड़ी अलग दर्ज हुई। एनडीटीवी ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में समय 10:20 बजे बताया। दूसरी तरफ राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र और खलीज टाइम्स की रिपोर्ट में यह समय 10:22 बजे दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया मॉनिटर ग्राउंड न्यूज ने इसे 10:23 बजे के रूप में सूचीबद्ध किया।
ग्राउंड न्यूज ने अलग-अलग राजनीतिक और संपादकीय झुकाव वाले कुल 42 समाचार आउटलेट्स की कवरेज को ट्रैक किया। इन सभी रिपोर्टों में भूकंप की सूचना तो एक समान थी, लेकिन समय, गहराई और केंद्र के नामकरण में स्रोत के आधार पर मामूली अंतर दिखाई दिया।
खलीज टाइम्स ने अपनी कवरेज में अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स और भारतीय एजेंसी एएनआई के हवाले से इस घटना को पश्चिमी शिज़ांग-भारत सीमावर्ती इलाके से जोड़कर प्रस्तुत किया। यह भिन्नता इसलिए आती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्रों को व्यापक भौगोलिक ग्रिड में रखकर पढ़ते हैं, जबकि स्थानीय भारतीय एजेंसियां इसे ठीक जिले और राज्य की सीमाओं के अनुसार दर्ज करती हैं।
दिल्ली-एनसीआर में असर की वजह
पहाड़ों से चली सिस्मिक तरंगें मैदानी इलाकों की ऊंची इमारतों में तुरंत पहुंचीं। दिल्ली सिस्मिक ज़ोन 4 में आती है। इसका मतलब है कि यह क्षेत्र मध्यम से उच्च खतरे वाले दायरे में है, जहां बार-बार भूकंपीय हलचल महसूस होती है। हिमालयी बेल्ट में उठने वाले कंपन की सीधी दिशा गंगा के मैदानी भाग की तरफ होती है, जिससे बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर झूला जैसा अहसास हुआ।
गुरुग्राम और नोएडा के रिहायशी टावरों में पंखे हिलने लगे और कांच के बर्तनों की आवाजें आईं। मैदानी इलाकों की नरम मिट्टी पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली सिस्मिक तरंगों के असर को बढ़ा देती है। जब यह ऊर्जा जमीन से गुजरती है, तो ऊंची इमारतों का ढांचा अपने प्राकृतिक दोलन के कारण कंपन को तेज कर देता है। यही कारण है कि भूतल पर खड़े व्यक्ति की तुलना में पंद्रहवीं या बीसवीं मंजिल पर रहने वालों को झटके का अहसास कहीं ज्यादा तीव्रता से हुआ।
उत्तरी भारत के मैदानों में हिमालय से आने वाले झटके हमेशा चिंता बढ़ाते हैं। दिल्ली-एनसीआर की सघन आबादी और गगनचुंबी इमारतों के चलते 4.9 तीव्रता का कंपन भी तुरंत घबराहट पैदा करता है। चमोली में केंद्र होने के बावजूद सैकड़ों किलोमीटर दूर कंक्रीट के ऊंचे ढांचे हिलने लगे, जिससे आपातकालीन अलार्म बजने की घटनाएं भी सामने आईं।
असम के नगांव में अलग हलचल
उसी दिन तड़के 4:23 बजे असम के नगांव जिले में 4.5 तीव्रता का एक अलग भूकंप दर्ज हुआ था। नगांव में केंद्र की गहराई 33 किलोमीटर थी, जिसका अक्षांश 26.428 N और देशांतर 93.060 E रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पूर्वोत्तर की अलग फॉल्ट लाइन पर हुआ स्वतंत्र घटनाक्रम था, जिसका चमोली की हलचल से संबंध नहीं है।
असम की इस घटना का समय और स्थान दोनों बिल्कुल अलग थे। 33 किलोमीटर की गहराई यह बताती है कि पूर्वोत्तर में चट्टानों का टूटना पृथ्वी की सतह से काफी नीचे हुआ था। उथले भूकंपों की तुलना में गहरी परतों में होने वाली हलचल सतह पर उतना तीव्र झटका नहीं देती, हालांकि उसका असर दूर तक दर्ज होता है।
एक ही कैलेंडर दिन में भारत के दो अलग-अलग हिस्सों में जमीन हिलने की घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा। असम का नगांव पूर्वोत्तर की अलग विवर्तनिक प्रणाली पर टिका है, जबकि उत्तराखंड पश्चिमी और मध्य हिमालय की फॉल्ट प्रणाली का हिस्सा है। इन दोनों घटनाओं के बीच कोई भौतिक या ऊर्जा संचरण का सीधा संबंध नहीं था।
भूकंप की पुष्टि और आधिकारिक स्रोत
सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो या गलत आंकड़े तेजी से फैलते हैं। किसी भी भूकंप की प्रामाणिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र का BhooKamp पोर्टल और मोबाइल ऐप सीधे आंकड़े जारी करते हैं।
- BhooKamp ऐप पर तीव्रता, केंद्र की गहराई, अक्षांश और देशांतर का तुरंत पता चलता है।
- चमोली भूकंप के भौगोलिक निर्देशांक अक्षांश 30.103 N और देशांतर 79.561 E दर्ज किए गए।
- कंपन महसूस होने पर लिफ्ट छोड़कर सीढ़ियों का उपयोग करें और खुले मैदान में जाएं।
सोशल मीडिया पर कई असंबद्ध तारीखों और आंकड़ों वाले पोस्ट भी शेयर होने लगे। कुछ उपयोगकर्ताओं ने 17 फरवरी को सुबह 5:36 बजे दिल्ली में आए 4.0 तीव्रता के पुराने झटके का जिक्र छेड़ दिया। कुछ अन्य खातों पर किसी बुधवार को रात 8:50 बजे आए 5.5 तीव्रता के भूकंप के आंकड़े डालकर भ्रम फैलाया गया। इस तरह के अपुष्ट पोस्ट वास्तविक घटना के समय आम जनता के बीच अनावश्यक अफरा-तफरी बढ़ाते हैं।
सीस्मोलॉजिकल एजेंसियों की तकनीकी प्रक्रिया बहुत सुव्यवस्थित होती है। जैसे ही किसी स्टेशन पर जमीन में हलचल दर्ज होती है, कंप्यूटर एल्गोरिदम सिस्मिक तरंगों के पी-वेव और एस-वेव के आगमन का समय मिलाते हैं। इसके बाद अक्षांश, देशांतर और गहराई की गणना पूरी होती है और प्रारंभिक बुलेटिन जारी किया जाता है।
सार्वजनिक निगरानी के लिए BhooKamp ऐप जैसे उपकरण सीधे केंद्रीय सर्वर से जानकारी साझा करते हैं। इससे सोशल मीडिया पर फैलने वाले पुराने वीडियो और गलत पैमानों की तुरंत पहचान हो जाती है। जब भी जमीन का कंपन महसूस हो, तो असत्यापित फॉरवर्ड संदेशों पर यकीन करने के बजाय सरकारी सीस्मोलॉजिकल नेटवर्क के डेटा को ही आधार बनाना चाहिए।
भूकंप के दौरान सुरक्षा उपाय
पहाड़ी या मैदानी इलाकों में कंपन होते ही पहली प्रतिक्रिया घबराहट की नहीं, बल्कि तुरंत सुरक्षित स्थिति में आने की होनी चाहिए। ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों को तुरंत बालकनी या खिड़कियों के पास जाने से बचना चाहिए।
सुरक्षित निकलने के कदम
- झटके का अहसास होते ही झुकें, किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे सिर ढककर बैठें और उसे कसकर पकड़े रहें।
- अगर मजबूत फर्नीचर न हो, तो कमरे के भीतरी कोने में फर्श पर बैठकर अपने दोनों हाथों से सिर और गर्दन की रक्षा करें।
- कांच की खिड़कियों, भारी अलमारियों, लटकते झूमरों और भारी तस्वीरों से हमेशा दूर हट जाएं ताकि उनके गिरने से चोट न लगे।
- बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकलते समय लिफ्ट का प्रयोग कभी न करें, क्योंकि बिजली गुल होने पर लिफ्ट शाफ्ट में अटक सकती है।
- सीढ़ियों का इस्तेमाल करते समय रेलिंग पकड़कर उतरें और भगदड़ से बचें।
- अगर आप बिस्तर पर हैं, तो वहीं रहें और अपने सिर को तकिये से अच्छी तरह सुरक्षित करें।
- इमारत से बाहर आने के बाद बिजली के खंभों, तारों, ट्रांसफार्मर और पुरानी जर्जर दीवारों से दूर खुले मैदान में खड़े हों।
- वाहन चलाते समय झटका महसूस हो, तो वाहन को पुलों, ओवरब्रिज और होर्डिंग्स से दूर सड़क किनारे सुरक्षित रोक दें और अंदर ही रहें।
चमोली की इस घटना में किसी तरह का ढांचागत नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सिस्मिक ज़ोन 4 में बसे शहरों और हिमालयी राज्यों के लिए यह सचेत रहने की जरूरत को रेखांकित करता है। जमीन के नीचे जमा होने वाली ऊर्जा कब और किस पैमाने पर बाहर निकलेगी, इसका सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता। ऐसी स्थिति में वैज्ञानिक निगरानी और समय पर मिली सटीक जानकारी ही लोगों को सुरक्षित रख सकती है।
References
- 1A 4.9-magnitude #earthquake struck #Uttarakhand on Tuesday night, with ...
- 2An earthquake of magnitude 4.9 struck Uttarakhand's Chamoli around ...
- 3Magnitude 5.1 earthquake hits western Xizang-India border region
- 4Strong earthquake tremors in Delhi NCR, - Facebook
- 5A 4.9-magnitude earthquake struck Uttarakhand on Tuesday night, with ...
- 6Magnitude 4.9 Earthquake Hits Uttarakhand's Chamoli; Tremors ...
Frequently asked questions
›चमोली में आए भूकंप का सही समय क्या था?
मंगलवार 6 अक्टूबर 2026 की रात यह कंपन 10:20 से 10:23 बजे IST के बीच दर्ज हुआ। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने इसका समय 10:22 बजे IST दर्ज किया।
›इस भूकंप की आधिकारिक तीव्रता कितनी थी?
भारतीय एजेंसी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने तीव्रता 4.9 मापी, जबकि यूरोपीय एजेंसी EMSC ने इसे 5.1 दर्ज किया।
›भूकंप का केंद्र जमीन में कितनी गहराई पर था?
NCS के अनुसार केंद्र 13 किलोमीटर गहराई पर था, जबकि EMSC ने गहराई 10 किलोमीटर (6.21 मील) दर्ज की।
›क्या उत्तराखंड या दिल्ली में कोई नुकसान हुआ है?
अधिकारियों के अनुसार कहीं से भी जान-माल के नुकसान या ढांचागत क्षति की कोई खबर नहीं मिली है।
›दिल्ली-एनसीआर में झटके इतने तेज क्यों महसूस हुए?
दिल्ली सिस्मिक ज़ोन 4 में आती है। हिमालयी क्षेत्र में 10 से 13 किलोमीटर की उथली गहराई पर आने वाले भूकंपों का कंपन मैदानी इलाकों और ऊंची इमारतों में आसानी से पहुंचता है।
›क्या असम के नगांव का भूकंप चमोली से जुड़ा था?
नहीं, असम के नगांव में सुबह 4:23 बजे आया 4.5 तीव्रता का भूकंप 33 किमी गहराई पर आया था और वह एक अलग भूगर्भीय घटना थी।
›चमोली भूकंप के सटीक कोऑर्डिनेट्स क्या हैं?
इस भूकंप का केंद्र अक्षांश 30.103 N और देशांतर 79.561 E दर्ज किया गया, जो चमोली जिले में स्थित है।
›क्या हिमाचल प्रदेश में भी झटके महसूस किए गए?
हां, फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार भूकंप के झटके उत्तर-पश्चिम में हिमाचल प्रदेश तक महसूस किए गए।
›भूकंप की सही जानकारी के लिए कौन सा ऐप इस्तेमाल करें?
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र का 'BhooKamp' मोबाइल ऐप भूकंप की सटीक और प्रामाणिक जानकारी देता है।
›झटके महसूस होने पर फौरन क्या करना चाहिए?
झटके महसूस होते ही लिफ्ट का इस्तेमाल छोड़ दें, सीढ़ियों से नीचे आएं और किसी मजबूत वस्तु के नीचे सिर को ढककर सुरक्षित रहें।



