प्रयागराज के चर्च लेन में नीम करोली बाबा का घर
प्रयागराज के चर्च लेन स्थित 18/4 नंबर का निजी घर नीम करोली बाबा के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ दर्शन के नियम और इस घर का इतिहास जानें।
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प्रयागराज के चर्च लेन में स्थित 18/4 नंबर का यह साधारण सा दिखने वाला निजी मकान आज उन लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जो नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं से गहरे जुड़े हैं। यह कोई सार्वजनिक मंदिर या ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्थान नहीं है, बल्कि एक निजी आवास है जिसने दशकों से अपनी दीवारों के भीतर उस आध्यात्मिक ऊर्जा को सहेज कर रखा है, जिसे स्थानीय भक्त बाबा का आशीर्वाद मानते हैं। शाम के समय जब चर्च लेन की गलियों में चहल-पहल होती है, इस मकान के बाहर जुटने वाली भक्तों की कतारें एक अलग ही शांति का अनुभव कराती हैं।
चर्च लेन का ऐतिहासिक संबंध
इस घर की नींव 1956 में रखी गई थी, जिसके सूत्रधार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी थे। प्रोफेसर मुखर्जी नीम करोली बाबा के अनन्य भक्त थे। उनका और बाबा का संबंध 1935 में कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में शुरू हुआ था। उस पहली मुलाकात के बाद, 1950 में जब बाबा का इलाहाबाद आगमन हुआ, तो प्रोफेसर मुखर्जी के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया। यह घर केवल ईंट-पत्थरों से बनी संरचना नहीं रहा, बल्कि बाबा के साधना स्थल के रूप में प्रतिष्ठित हो गया। 1997 में प्रोफेसर मुखर्जी के निधन तक यह घर उनकी आध्यात्मिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बना रहा।
वर्तमान में इस धरोहर को सत्या पांडे और उनके पति इंद्रेश प्रसाद सहेज रहे हैं। इस संबंध की कहानी भी भावुक है; मुखर्जी दंपत्ति की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने सत्या पांडे को अपनी बेटी के रूप में अपनाया था। आज यह दंपत्ति एक संरक्षक की भूमिका निभाते हुए इस घर की शुद्धता और उसकी परंपराओं को कायम रखे हुए है।
संरक्षित कक्ष की दिव्यता
घर के भीतर एक कक्ष को उस अवस्था में सुरक्षित रखा गया है, जैसा वह बाबा के प्रवास के दौरान हुआ करता था। इस कमरे में प्रवेश करते ही एक अलग गंभीरता महसूस होती है। कमरे के बीचों-बीच वह तख्त मौजूद है जिस पर बाबा विश्राम करते थे और उनकी साधना का तकिया आज भी उसी सम्मान के साथ रखा गया है। यह स्थान कोई संग्रहालय नहीं है, बल्कि एक जीवित प्रार्थना स्थल है।
नियमित दिनचर्या का यहाँ कड़ाई से पालन किया जाता है। कमरे में रोज ताजे फूल अर्पित किए जाते हैं, और हर मंगलवार को यहाँ की चादर बदली जाती है। यह रस्म उस सादगी को दर्शाती है जो बाबा के जीवन का मूल मंत्र था। जो भक्त यहाँ आते हैं, वे इन वस्तुओं को किसी अलौकिक शक्ति के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
भोग और सात्विक परंपराएँ
नीम करोली बाबा के प्रति समर्पण का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण यहाँ लगने वाला भोग है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि उन स्वादों को फिर से जीवंत करने का प्रयास है जिन्हें बाबा स्वयं पसंद करते थे। यह भोजन सात्विक और साधारण होता है, जो किसी भी दिखावे से दूर है।
| भोग सामग्री | महत्व और विशेषता |
|---|---|
| लौकी की सब्जी | बाबा के भोजन का मुख्य हिस्सा |
| मूंग की दाल | हल्की और सात्विक आहार की प्राथमिकता |
| बेसन की रोटी | बाबा की प्रिय सात्विक पारंपरिक सामग्री |
ये भोजन सामग्री आज भी उसी विधि से तैयार की जाती है, जैसा प्रोफेसर मुखर्जी के समय में होता था। सत्या पांडे और इंद्रेश प्रसाद यह सुनिश्चित करते हैं कि भोग की गुणवत्ता और शुद्धता में कोई कमी न आए। यह भोजन न केवल एक परंपरा है, बल्कि उस समय की यादों को जीवित रखने का माध्यम भी है जब बाबा स्वयं इस घर में बैठकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देते थे।
फिल्म और वास्तविक अनुभव
हाल के समय में 'हनुमान अंश' फिल्म की चर्चा ने नीम करोली बाबा के प्रति जनमानस की उत्सुकता को कई गुना बढ़ा दिया है। फिल्म की सफलता के आंकड़े स्वयं इसकी गवाही देते हैं, जहाँ 42 दिनों के भीतर ही इसे 309.15 करोड़ रुपये का वैश्विक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मिला है। फिल्म में बाबा के जीवन को दर्शाया गया है, जिसे कंगना रनौत और वरुण धवन जैसे कलाकारों ने भी सराहा है।
तथ्यों के स्तर पर स्पष्ट करना आवश्यक है कि 'हनुमान अंश' की शूटिंग इस घर में नहीं हुई है। यह पूरी फिल्म विशाल चतुर्वेदी की पुस्तक 'डिवाइन डिटूर: दैट चेंज्ड माई लाइफ' पर आधारित है। फिल्म की व्यावसायिक सफलता और इस घर के प्रति बढ़ते आकर्षण के बीच स्पष्ट अंतर है। इस मकान का आध्यात्मिक महत्व किसी फिल्म की रिलीज से दशकों पहले से स्थापित है। फिल्म का आना केवल एक माध्यम बना है जिसने युवा पीढ़ी का ध्यान इस प्राचीन और पवित्र स्थान की ओर खींचा है। फिल्म निर्माताओं ने भी पुष्टि की है कि इसका सीक्वल विकास के चरण में है, जो भविष्य में और भी अधिक लोगों को इस विषय से जोड़ने का काम करेगा।
दर्शन और मर्यादाएँ
प्रयागराज के इस घर में दर्शन की प्रक्रिया अत्यंत सरल है, जो व्यावसायिकता से पूरी तरह मुक्त है। यहाँ प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है, और न ही यहाँ किसी भी प्रकार का आर्थिक दान स्वीकार किया जाता है। यह स्पष्ट नीति इस घर के वातावरण को शुद्ध बनाए रखती है।
दैनिक दर्शन का समय शाम 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक निर्धारित है। इस दौरान जो भी भक्त आते हैं, उन्हें दर्शन के पश्चात प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं। यह प्रसाद केवल मिष्ठान नहीं, बल्कि एक आशीर्वाद माना जाता है जिसे भक्त श्रद्धापूर्वक ग्रहण करते हैं।
आध्यात्मिक मान्यताएं और अनुभव
सत्या पांडे अक्सर एक विशेष घटना का उल्लेख करती हैं जो इस घर की दिव्यता को रेखांकित करती है। उनके अनुसार, प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी को नीम करोली बाबा ने साक्षात हनुमान जी के रूप में दर्शन दिए थे। यही कारण है कि आज भी बहुत से लोग इस घर को हनुमान जी का अंश मानते हैं और इसी विश्वास के साथ यहाँ आते हैं।
जब हम इस स्थान पर होने वाली गतिविधियों का विश्लेषण करते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि यहाँ का आकर्षण किसी विज्ञापन या प्रचार का परिणाम नहीं है। यह एक निरंतर चलने वाली परंपरा है जिसे एक परिवार ने अपनी पूरी निष्ठा के साथ निभाया है। 1956 से लेकर आज तक, इस घर ने अपने भीतर उन लोगों को आश्रय दिया है जो शांति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की तलाश में यहाँ आते हैं।
आगंतुकों के लिए मार्गदर्शिका
यदि आप इस स्थान पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह एक निजी आवास है। यहाँ आने का उद्देश्य पर्यटन नहीं, बल्कि श्रद्धा और दर्शन होना चाहिए।
- 1समय पालन: दर्शन केवल शाम 5:00 बजे से 8:00 बजे के बीच ही संभव हैं। इस समय सीमा का सम्मान करना अति आवश्यक है।
- 2दान की मनाही: घर के भीतर किसी भी प्रकार की नकद राशि या अन्य दान स्वीकार नहीं किया जाता है। कृपया इस नियम का पालन करें।
- 3गरिमा बनाए रखना: यह एक शांत स्थल है। यहाँ की मर्यादा और शांति का ध्यान रखना प्रत्येक आगंतुक का कर्तव्य है।
- 4प्रसाद: दर्शन के बाद मिलने वाले लड्डू को प्रसाद के रूप में ही ग्रहण करें।
इस घर की सबसे बड़ी विशेषता इसका सादगी भरा होना है। यहाँ कोई बड़ा द्वार नहीं है, न ही कोई भव्य नक्काशी, लेकिन यहाँ की हवा में जो एकाग्रता है, वह किसी भी बड़े मंदिर से कम नहीं है। प्रोफेसर मुखर्जी ने जिस उद्देश्य के साथ इस घर को बाबा के लिए समर्पित किया था, वह आज भी वैसा ही बना हुआ है।
अंततः, यह स्थान उन लोगों के लिए एक तीर्थ है जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ से अलग, कुछ समय के लिए एक स्थिर और पवित्र स्थान पर बैठना चाहते हैं। चाहे आप 'हनुमान अंश' फिल्म देखकर प्रेरित हुए हों या बाबा के प्रति आपकी व्यक्तिगत आस्था हो, 18/4 चर्च लेन का यह मकान आपको निराश नहीं करेगा। यह केवल एक पता नहीं, बल्कि एक इतिहास है जो आज भी जीवित है, सांस ले रहा है और आने वाले हर आगंतुक को अपने भीतर के हनुमान स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है।
References
- 1Why Neem Karoli Baba devotees are flocking to this Prayagraj home after Hanuman Ansh - India Today
- 2Neem Karoli Baba: A house associated with Neeb Karori Baba draws devotees amid ‘Hanuman Ansh’ rise | Prayagraj News - Th
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Frequently asked questions
›क्या यह घर सरकारी ट्रस्ट के अधीन है?
नहीं, यह एक निजी निवास है जिसे सत्या पांडे और इंद्रेश प्रसाद संभाल रहे हैं।
›क्या यहाँ दर्शन के लिए टिकट लगता है?
नहीं, दर्शन पूरी तरह निशुल्क हैं और कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
›घर में प्रवेश का समय क्या है?
दर्शन के लिए शाम 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक का समय निर्धारित है।
›क्या फिल्म 'हनुमान अंश' यहाँ शूट हुई है?
नहीं, फिल्म की शूटिंग इस स्थान पर नहीं हुई है।
›क्या यहाँ दान पेटी रखी गई है?
नहीं, यहाँ कोई भी मौद्रिक दान स्वीकार नहीं किया जाता है।
›मंगलवार का दिन यहाँ खास क्यों है?
मंगलवार को विशेष पूजा होती है और बाबा के कमरे की चादर बदली जाती है।
›प्रसाद में क्या दिया जाता है?
दर्शन के बाद आगंतुकों को प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं।
›क्या यहाँ रहने की सुविधा उपलब्ध है?
नहीं, यह घर केवल दर्शन के लिए खुला है, ठहरने की व्यवस्था नहीं है।
›इस घर का निर्माण कब हुआ था?
इसका निर्माण 1956 में प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी ने करवाया था।
›क्या फिल्म का सीक्वल बन रहा है?
हाँ, निर्माताओं ने 'हनुमान अंश' के सीक्वल की पुष्टि की है।
Sources referenced
- Why Neem Karoli Baba devotees are flocking to this Prayagraj home after Hanuman Ansh - India Today
- Neem Karoli Baba: A house associated with Neeb Karori Baba draws devotees amid ‘Hanuman Ansh’ rise | Prayagraj News - The Times of India
- प्रयागराज का वो घर जहां नीम करोली बाबा ने बिताई थी रात... हनुमान अंश ने किया फेमस, लगी भक्तों की भीड़ - hanuman ansh effect neem karoli baba prayagraj house goes viral know why box office collection tmova - AajTak
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